पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA को पाकिस्तान की सरजमीं पर ड्रोन बेस बनाने की अनुमति नहीं दी है। अब हुआ यूं जनाब कि अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से घर वापसी कर रही है। ऐसी स्थिति में इमरान खान के इस निर्णय ने विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी एजेंसियां पाकिस्तान में खुफिया जगह बनाकर अफगानिस्तान में अलकायदा समेत अन्य आतंकवादियों पर अपनी पैनी नजर रखना चाहती थी, लेकिन इमरान खान ने ऐसा करने से मना कर दिया है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों में से पाकिस्तान ही एक ऐसा देश है, जहां अमेरिका अपना बेस बना सकता है इसीलिए अमेरिका पाकिस्तान से बेस बनाने की गुजारिश कर रहा है। पाकिस्तान अमेरिका के लिए अब मजबूरी बन गया है क्योंकि अफगानिस्तान के जो अन्य पड़ोसी देश हैं जैसे तुर्कमेनिस्‍तान और उज्‍बेकिस्‍तान इन पर रूस अपना प्रभाव बनाये हुए है। बात यहीं तक नहीं है। अफगानिस्तान के पड़ोसी देश ईरान के साथ भी अमेरिका के रिश्ते ट्रंप के समय से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बता दें कि पाकिस्तान पर तालिबान को मदद देने के आरोप पहले से लगते रहे हैं। पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच रिश्ते अच्छे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चुनाव जीतने के साथ-साथ यह घोषणा की थी कि वो सीआईए और अमेरिकी सेनाओं को पाकिस्तान में बेस बनाने या काम करने की इजाजत नहीं देंगे। यह सब होने के बाद भी अमेरिका ने पाकिस्तान से तालिबान तक और अलकायदा पर कई ड्रोन हमलों को अंजाम भी दिया है।

बताते चलें कि अमेरिका को पाकिस्तान में बेस बनाने के लिए इनकार करने के पीछे इमरान खान को डर भी सता रहा है। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह लगता है कि अगर उन्होंने तालिबान पर किसी भी तरह की कार्यवाही के लिए अमेरिका की सहायता की तो उन्हें मुस्लिम कट्टरपंथियों का विरोध सहना पड़ेगा और इन सब के चलते उनकी सरकार संकट में आ जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुल्विन ने कहा है कि अफगानिस्तान को आतंकियों का अड्डा न बनने देने के लिए अमेरिका और पाकिस्तान की आपस में बात जारी है।

बता दें कि अमेरिकी एजेंसी CIA के निदेशक विलियम बर्न्स ने यह चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिकों की घर वापसी के बाद अलकायदा और ISIS दोबारा से मजबूत हो सकते हैं। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने अपने बयानों में कहा है कि दोनों आतंकी संगठन सिर्फ दो साल के अंदर अमेरिका पर हमला के लिए तैयार किये जा सकते हैं। इस पूरे मामले को लेकर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि ‘शांति या संघर्ष’ अब यह पाकिस्तान को तय करना होगा।

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