कोरोना संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण ने मोदी सरकार को लेकर तल्ख टिप्पणी की है, उनकी टिप्पणी से सरकार की किरकिरी हो रही है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा- हम 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाकर उन्हें खुश कर सकते हैं पर ये काफी नहीं है।

डॉक्टरों पर हमले को लेकर उन्होंने कहा- ये दुख की बात है कि किकसी और कि विफलता की सजा जीवन बचाने वाले डॉक्टर भुगत रहे हैं। चीफ जस्टिस ने कहा- मोदी सरकार इस सेक्टर को प्राथमिकता नहीं दे रही है, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी आज देश में चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने न्यायपालिका के भीतर सरकार की दखल को लेकर भी चिंता जताई, कहा- सबका आत्मसम्मान बना रहना लोकतंत्र में सबसे जरूरी है।

कोरोना महामारी में डॉक्टर अस्पतालों में अपना फर्ज निभा रहे हैं। डॉक्टर भी असुरक्षा के माहौल में काम कर रहे हैं, महामारी की दोनों लहरों में 1550 डॉक्टरों की कोरोना से मौत हो चुकी है। मरने वाले 1550 डॉक्टरों में से ज्यादातर के परिवारों को 50 लाख के बीमा का लाभ नहीं मिला है, यह लाभ दूसरी लहर में जान गंवाने वाले एक भी डॉक्टर्स के परिवार को यह लाभ नहीं मिला है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जे.ए. जयालाल ने बताया कि पहली लहर में मृत डॉक्टरों में महज 25% के परिवारों को यह राशि मिली है। उन्होंने बताया कि कागजी दस्तावेजों के कारण भी मुआवजे के लिए पीड़ित परिवार भटक रहे हैं, हालांकि IMA अपनी ओर से 10 लाख की मदद दे रही है।

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