नए आईटी रूल्स को लेकर भारत सरकार और ट्विटर के बीच तनातनी एक लंबे समय से जारी है। इसी बीच खबर यह आ रही है कि यूएन भी बीच में आ गया है। अब UN के एक्सपर्ट का कहना है कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मानदंड से मैच नहीं होते। नए कानूनों को लेकर UN के विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मापदंड में खरा नहीं उतरता और इसी के साथ ही नए कानूनों पर अपनी चिंता भी जाहिर की है।

बता दें कि भारत सरकार को लिखे यूएन की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत सरकार की तरफ से लाए गए नए कानूनों के बारे में और विचार विमर्श होना चाहिए। जिससे कि यह अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ न हो। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को IT से जुड़े नियम बनाने का अधिकार है, लेकिन यह भी कहा गया है कि लंबे चौड़े नियम बनाना भी अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के खिलाफ है।

बताते चलें कि रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि आईटी कानून इंटरनेशनल कॉवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) का उल्लंघन कर रहे हैं। सरकार से हम यह अपील करते हैं कि वह इसकी व्यापक समीक्षा करे। सोशल मीडिया की नई गाइडलाइन के बाद से ही सरकार और ट्विटर के विवाद लगातार जारी है।

वहीं दूसरी तरफ सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रीय (आईटी) मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बात पर जोर देकर कहा कि ट्विटर को नियम तो मानना ही पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया को लेकर नई गाइडलाइन किसी भी तरह से अभिव्यक्यित की आजादी पर रोक नहीं लगा रहे हैं।

फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के लिए नई गाइडलाइन और इसके विवाद को लेकर केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा है कि यह कंपनियाँ भारत में बिजनेस और यहां से मुनाफा कमाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन इन कंपनियों की भारत के संविधान के प्रति जवाबदेही भी है।

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